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खेती में नई-नई तकनीक अपना रहे हैं किसान
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शहडोल | 12-अप्रैल-2018
 
  
   खेती में आधुनिक एवं नवीन संसाधन है। अपना कर किसान अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। सीहोर जिले में ऐसे अनेक किसान हैं, जिन्होंने सिंचाई में नई तकनीक को अपनाया है, इन किसानों ने खेतों में गहरी जुताई की और बीजों की सफाई तथा ग्रेडिंग का कार्य करवाया। इससे इन किसानों की आमदनी बढ़ी है।
   सीहोर जिले के नसरुल्लागंज में 5 एकड़ सिंचित कृषि भूमि के किसान राहुल जाट बताते हैं कि वे वर्षों से अपने खेत में बख्खर चलाकर खेत तैयार किया करते थे। खरीफ सीजन में फसलों में नींदा का ज्यादा असर होने के कारण उत्पादन कम ही मिल पाता था। कृषि विभाग के मैदानी अमले की सलाह पर खेत में गहरी जुताई करवाई। इसका असर यह हुआ कि फसल में कीड़ों का प्रकोप कम हुआ और पूरे सीजन जमीन में नमी बनी रही। इस तकनीक से 30 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ है। वे अब अन्य किसान साथियों को भी सलाह देते हैं कि खेत में कम से कम 3 साल में एक बार गहरी जुताई अवश्य करवायें।
   इछावर तहसील के ग्राम रामनगर के किसान तेज सिंह ठाकुर के पास 20 एकड़ कृषि भूमि है। वे अपने खेत में वर्षों से परम्परागत तरीके से खेती करते आ रहे हैं। कृषि उत्पादन में आ रही गिरावट से वे चिंतित रहने लगे थे। उन्होंने कृषि विभाग की अनुदान योजना पर स्पाइरल शीड ग्रेडर मशीन खरीदी और ग्रेडिंग का कार्य शुरू किया। इस तकनीक को अपनाने से उन्हें अधिक कृषि उत्पादन मिला। उन्होंने बीज ग्रेडिंग की तकनीक सोयाबीन में भी अपनाई, जिसके अच्छे परिणाम उन्हें मिले हैं।
   सीहोर के नजदीक ग्राम पिपलीयामीरी की महिला कृषक लक्ष्मीबाई कुशवाह के पास खेती की 8 एकड़ जमीन तो थी, लेकिन सिंचाई के साधन पर्याप्त नहीं थे। उन्होंने इस संबंध में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी की मदद से खेत में नल-कूप खनन करवाया। इसके बाद स्प्रिंकलर अनुदान योजना का लाभ लिया। लक्ष्मीबाई को इसमें 12 हजार रुपये का अनुदान भी मिला तो उन्होंने स्प्रिंकर सेट खरीदा। अब वे बताती हैं कि उनके द्वारा खेत में पानी का शत-प्रतिशत उपयोग हो रहा है। खेत में चारों तरफ पानी पहुँचने से उन्हें मिलने वाला कृषि उत्पादन भी बढ़ा है। अब वे उद्यानिकी फसल को लगाने का मन बना रही हैं।
   बुधनी तहसील के ग्राम जोनतला के 10 एकड़ कृषि भूमि के किसान भगवानदास के पास सिंचाई के लिये डीजल पम्प नहीं था। इसकी वजह से वे अपने खेत में पूरी तरह से कृषि उत्पादन नहीं ले पाते थे। कृषि विभाग की मदद से 5 हार्स-पॉवर का डीजल पम्प सब्सिडी पर खरीदा। उन्हें इस पर 10 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। किसान भगवानदास ने खरीफ सीजन में धान पूसा बासमती की फसल ली है, इससे उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा भी हुआ है। इस बार उन्होंने रबी सीजन में भी गेहूँ की फसल में डीजल पम्प की मदद से सिंचाई की है। इसके भी अच्छे परिणाम भी मिले हैं।
(99 days ago)
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