समाचार
|| एक आदतन अपराधी जिला बदर || स्व. श्री लक्ष्मण सिंह गौढ़ स्मृति पुरस्कार के लिये आवेदन आमंत्रित || विभागीय कार्रवाई से असंतुष्ट हैं, तो जनसुनवाई में आकर बतायें सीएम हेल्पलाइन के शिकायतकर्ता || मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना का लाभ 31 जुलाई तक || मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई का समय 11 से एक बजे तक- आवेदक समय पर पहुंचे || म.प्र. पर्यटन क्विज प्रतियोगिता 31 जुलाई को || कलेक्टर शामिल हुए ग्राम चौपाल में || औद्योगिक क्षेत्र के भूखण्ड आवंटन हेतु ऑनलाईन आवेदन 25 जुलाई तक आमंत्रित || क्रीड़ा परिसर इंदौर में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 23 जुलाई को || बीएलबीसी की बैठक 24 जुलाई को
अन्य ख़बरें
अब खुद के मकान में चैन की नींद सोते हैं जीवन सिंह परमार (सफलता की कहानी)
"ऐसा लगता है मानो मां की गोद में सो रहे हों" प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली छत्रछाया
उज्जैन | 25-जून-2018
 
   यदि हमें घर की अहमियत जानना हो,आश्रय का महत्व समझना हो, सिर पर छत क्यों जरूरी है यह जानना हो, तो उससे पूछना चाहिए जो या तो किसी किराए के मकान में रहता हो या बेघर हो। अक्सर देखा होगा जब कोई भवन या मकान बन रहा होता है और छत निर्माण करने की बारी आती है तो सबसे पहले उस जगह की पूजा कर उसे सम्मान दिया जाता है। जरा सोचिए जो लोग बेघर होते हैं उन पर क्या बीतती होगी जब गर्मी के मौसम में आग उगलते सूरज, तेज बारिश में नुकीले बाणों की तरह शरीर पर लगती बूंदे और कड़कड़ाती ठंड से बचने के लिये उनके पास कोई आसरा नहीं होता था।
   जिस तरह कोई पंछी आसमान में कितना ही ऊंचा उड़ ले, वह वापस जमीन पर अपने बनाए हुए घोंसले में ही आता है। उसी प्रकार हर आवासहीन की ख्वाहिश होती है कि उसका भी कोई आशियाना हो।प्रधानमंत्री आवास योजना ने गरीबों को खुद का मकान बनाने का सपना साकार करने का काम किया है। उज्जैन के मक्सी रोड स्थित जोगीपुरा में नगर निगम द्वारा पात्र हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु 2.5 लाख रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई। विगत 1 साल में यहां 39 मकान बन चुके हैं, जिसका विधिवत ग्रह प्रवेश गत शनिवार 23 जून को हितग्राहियों द्वारा किया गया। खास बात यह रही कि इसके साक्षी स्वयं देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बने।
   इस अवसर पर हमने हितग्राहियों से उनकी प्रतिक्रिया जानना चाही। जोगीपुरा में रहने वाले जीवन सिंह के घर के भीतर जब गए तो वे अपने 5 वर्षीय बालक के साथ बड़े चैन की नींद सो रहे थे। थोड़ी देर बाद हलचल सुनकर जीवन सिंह की नींद खुल गई,लेकिन उनका बच्चा सोता रहा। बच्चे के सिर पर हाथ फेरते हुए जीवन सिंह ने बताया कि वे जब छोटे से थे, तो अपनी मां की गोद में इसी तरह चैन से सोया करते थे। अमीरी-गरीबी, ऊंच-नीच, आने वाले कल किसी की भी चिंता नहीं थी। जैसे जैसे बड़े हुए चिंताएं बढ़ती गईं, जीवन सिंह "जीवन" की आपाधापी में इतने उलझ गए कि फिर उन्हें वह सुकून भरी नींद नसीब ना हो सकी।
   जब चिंताओं ने अजगर की तरह मस्तिष्क को जकड़ कर रखा हो तो नींद सबसे पहले काफूर हो जाती है। जीवन सिंह पेशे से मजदूर हैं। परिवार में 4 बच्चे, पत्नी और मां है। पहले कनासिया में किराए के मकान में रहा करते थे। मजदूरी केवल इतनी मिलती थी की दो समय की रोटी का इंतजाम हो सके। जब दूसरों के घर बनते हुए देखते थे और उन घरों की ईटें अपने सिर पर ढोते थे तो उनका मन ईटों के वजन से भी ज्यादा भारी हो जाता था। यह सोच कर कि क्या उनका भी कभी अपना घर बन पाएगा या नहीं। वे और उनके जैसे कई अनगिनत गरीबों की परवाह आखिर कौन करेगा। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना ने जीवन सिंह के निराश जीवन में खुशियों के पंख लगा दिए और उनके मन से सारी चिंताओं का बोझ हटा दिया।
   जीवन सिंह को पिछले वर्ष प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए ढाई लाख रूपय की सहायता राशि मिली। जिससे बहुत कम समय में उनका मकान बनकर तैयार हो गया। बचपन के बाद अब जीवन सिंह कि जिंदगी में वही क्षण दोबारा आ सका है, जिसमें वे बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह चिंता मुक्त होकर सोते हैं। इसके लिए वे सरकार को कोटि कोटि धन्यवाद देते हैं।
" पक्का मकान बन जाने से सांप बिच्छू का आना हुआ बंद"
" अब बेखौफ घूमते हैं भारत के छोटे बच्चे घर में"
   जीवन सिंह के घर से बिल्कुल लगा हुआ घर भरत पिता काशीराम का है। भरत हाथ ठेला चलाते हैं। जब से होश संभाला तब से कच्चे मकान में रहा करते थे। परिवार में चार लड़के, दो बहुएं और पोता-पोती हैं। पहले कच्चे मकान में कच्ची जमीन से अक्सर सांप बिच्छू निकल कर बाहर आ जाते थे,जिससे उनके पोते-पोती के जीवन को खतरा हो गया था।
   काम-धंधा यहीं पर था तो कहीं दूसरी ओर मकान भी नहीं ले सकते थे। ठेले पर बोझ ढोते-ढोते उन्हें अपना जीवन भी बोझ लगने लगा था। भरत को हमेशा इस बात का मलाल रहता था कि वे जिंदगी भर अपने बच्चों के लिए कुछ नहीं कर सके लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बन जाने के बाद भारत के मायूस चेहरे पर फिर जीने की उमंग आ गई है इसका श्रेय वे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को देते हैं। भरत का कहना है कि अपने शेष दो बेटों की शादी वे नए घर से ही करेंगे। अब उनके पोता-पोती भी बेखौफ होकर पक्के मकान में घूमते हैं।    
"पेलां पानी पड़ता था, तब वी दुख में था"
" अच्छा करिया सरकार ने "-सरजूबाई
   85 साल की सरजूबाई पहले टीन शेड से ढंके कच्चे मकान में रहा करती थीं। बारिश के मौसम में जब भी टीन की चादरों के बीच पड़ी दरारों से पानी टपकता था, तो सरजूबाई की पथराई आंखों में भी पानी आ जाता था। पति के कम उम्र में गुजर जाने के बाद सारी जिंदगी मेहनत मजदूरी कर बिताई। लेकिन इस आयु में जब शरीर साथ छोड़ देता है तो आराम के कुछ पल बिताना सरजूबाई के लिए जरूरी भी था और उनका हक भी।
   कच्चे मकान में रहते हुए अंदर ही अंदर उनके मन में टीस उठती थी। धीरे-धीरे जीने की इच्छा खत्म हो गई थी। ऐसा नहीं है कि वे घर में अकेली हैं, परिवार में बेटा,बहू, पोती,पोता और उसकी पत्नी भी हैं। ये  सभी साथ में रहते हैं। पोते विकास ने बताया कि परिवार में सभी लोग छोटा-मोटा काम धंधा करते हैं, लेकिन इतनी आमदनी नहीं हो पाती कि इस महंगाई के जमाने में खुद का मकान बनाकर अपनी दादी को मरने से पहले कुछ समय के लिए चिंतामुक्त जीवन दे सकें।
   प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत खुद का मकान बन जाने के बाद जैसे सरजू बाई के शरीर में नई उर्जा का संचार हुआ है। अब वे अपने अंतिम दिनों में सुकून से खुद के मकान में रह सकेंगी। सरजू बाई राज्य एवं केंद्र सरकार को इसके लिए धन्यवाद और आशीर्वाद दोनों देती हैं।
" जीवन में कभी नहीं सोचा था कि खुद का मकान होगा"-कमल
"स्वर्गीय माता पिता की अंतिम इच्छा पूरी हुई"
   जोगीपुरा में ही रहने वाले एक अन्य हितग्राही कमल जूनवाल ने बताया कि उन्होंने कभी अपने जीवन में नहीं सोचा था कि वे खुद का मकान बना सकेंगे। 45 वर्षीय कमल पेशे से प्लंबर हैं। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। उनके स्वर्गीय माता-पिता की अंतिम इच्छा थी कि उनका बेटा एक दिन अपनी मेहनत से बनाए हुए मकान में रहेगा। लेकिन सीमित आमदनी के कारण वे अपने माता पिता के अंतिम इच्छा पूर्ण करने में असमर्थ थे।
   प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ना केवल उन्हें शासन द्वारा मकान  बनाने के लिए अनुदान राशि मिली, बल्कि विद्युत और पेयजल कनेक्शन भी लगा कर दिया गया। अब 24 घंटे उनके घर में बिजली आती है। कमल पहले देवास रोड स्थित अपने गांव में रहते थे, 1 वर्ष में उनका खुद का आवास प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बनकर तैयार हो गया। जिसका ग्रह प्रवेश उन्होंने विगत शनिवार को किया।                                  
"पवन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब प्रधानमंत्री से बात की"  
   शनिवार को हितग्राहियों के सामूहिक ग्रह प्रवेश के दौरान इंदौर में आयोजित कार्यक्रम से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश के विभिन्न हितग्राहियों से चर्चा की। उज्जैन की जोगीपुरा से पवन परमार ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को धन्यवाद देते हुए अपनी भावनाएं वीडियो कॉलिंग के माध्यम से व्यक्ति की। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री से बात कर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्हें भी इस योजना के तहत आवाज बनाने के लिए सहायता राशि मिली।
(20 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
जूनजुलाई 2018अगस्त
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
2526272829301
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
303112345

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer