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केसर की खेती साबित हो रही है सुरेश के लिए मुनाफे का सौदा "कहानी सच्ची है..."
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शिवपुरी | 28-जून-2018
 
    शिवपुरी जिले के किसान अब परम्परागत खेती के साथ-साथ नगदी फसलों का उत्पादन लेकर अच्छे दाम ले रहे है। जिससे कृषि मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है। शिवपुरी जिले के बदरवास तहसील के अगरा ग्राम के अनुसूचित जनजाति के कृषक सुरेश पुत्र भगवान आदिवासी ने अमरिकन हाइब्रिड केसर की खेती मात्र ढाई बीघा में कर उससे एकत्रित किए गए 70 किलो फूलों से केसर का उत्पादन लिया। जिसका दाम 60 से 65 हजार रूपए प्रति किलो है।
    केसर को बेचने हेतु सुरेश ने इंटरनेट के माध्यम से गुजरात, मुम्बई और जयपुर के व्यापारियों से संपर्क किया। गुजरात के एक व्यक्ति द्वारा 35 हजार रूपए किलों के मान से खरीदने को तैयार थे। लेकिन केसर की मार्केट में ऊंचे दाम होने के कारण सुरेश ने 35 हजार रूपए प्रति किलो के मान से केसर बेचने में असमर्थता व्यक्त की है। जब केसर का भाव 50 से 60 हजार रूपए प्रति किलो होगा, तब वह बेचेंगे। जिससे उन्हें सीधा 45 लाख का मुनाफा होगा। केसर की खेती से सुरेश बहुत खुश है और आसपास के किसान भी केसर के अच्छे दाम मिलने से इसकी खेती करने को तैयार है। उसका कहना है कि अगर वो 50 बीघा जमीन में परम्परागत फसल लेते तो उसे इतने दाम नहीं मिलते जो तीन बीघा भूमि में अमरीकन केसर की फसल लगाकर मिले है।
    मत्स्य विज्ञान में स्नातक श्री सुरेश ने बताया कि तीन बीघा जमीन में केसर की फसल लेने हेतु उसे 1 लाख 20 हजार रूपए खर्च किए। प्रति बीघा 4 से 5 क्विंटल केसर का उत्पादन होता है और यह केसर 60 से 65 हजार रूपए प्रति किलो के मान से मार्केट में बिकती है। इस प्रकार फसल बेचने पर उसे 45 लाख से अधिक का मुनाफा भी होगा।
    सुरेश ने मुंबई से अमरीकन केसर के बीज लाकर अपनी तीन बीघा जमीन में बोनी की। मात्र पांच माह में केसर की फसल तैयार हो गई। केसर के पौधो पर लगे फूलो को इकट्ठा किया, जो लगभग 70 किलो थे। केसर का मार्केट बाजार 60 से 65 हजार रूपए प्रति किलो है। लेकिन अभी उचित दाम नहीं मिलने पर केसर नहीं बेची है। सुरेश ने केसर बेचने से पहले केसर के फूल टेस्टिंग के लिए प्रयोगशाला मुम्बई भेजे। टेस्टिंग के दौरान केसर में 35 प्रतिशत अर्क निकला। जिसका मार्केट बाजार 60 से 65 हजार रूपए प्रति किलो है।  
    सुरेश का कहना है कि अब वह अपने खेतों में स्टीविया की भी खेती करेंगे। जिसके मार्केट में अच्छे दाम मिलते है। स्टीविया के पौधो की पत्तियों को पांच साल तक काट-छांट कर ये पत्तियां बेचने पर प्रति क्विंटल पांच से 6 हजार रूपए प्राप्त होंगे। स्टीविया के पत्तों की मुख्य विशेषता यह है कि इस पत्ती से मधुमेह के रोगियों को चाय-काफी के उपयोग में आने वाली सुगर फ्री बनाई जाती है। एक बार स्टीविया का पौधा लगाने से लगातार पांच साल तक उसकी पत्तियों से मुनाफा लिया जा सकता है। श्री सुरेश का कहना है कि किसान भाई आधुनिक एवं उन्नत तकनीकी का उपयोग कर नगदी फसलें लें। जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार होगा और कृषि लाभ का धंधा भी बनेगा।
(87 days ago)
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