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‘‘स्वसहायता समूह की छोटी-छोटी बचत एवं उसके व्यवस्थित उपयोग से परिवार बना लखपति (सफलता की कहानी)
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शहडोल | 12-जुलाई-2018
 
   
    आशा राठौर की जिजी विषा एवं स्वसहायता समूह के सम्बल ने लखपति बना दिया। सोच के अनुसार छोटी-छोटी बचत तथा उसका बेहतर उपयोग करने के साथ ही परिवार के प्रतिबद्धता से पूरा परिवार खुश है।
    आशा राठौर ने बताया कि महज 17 वर्ष की उम्र में मेरे पिता ने मेरा विवाह साखी निवासी से कर दिया। जब ससुराल पहुंची तो सास-ससुर और 02 देवर, पति और मैं कुल 06 लोगों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति पर थी। वे किराये से सेंटरिंग प्लेट लेकर राजमिस्त्री का कार्य करते थे। धीरे-धीरे परिवार में और बढ़ोत्तरी हुई मेरे 02 बच्चे हो गये किन्तु आमदनी का जरिया एक ही था। घर की स्थिति देखकर मुझे तकलीफ होती थी और मैं कुछ करना चाहती थी।
    पहले मैं अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती थी क्योंकि पैसे नहीं होने के कारण जैसे मेरी इच्छा थी कि मैं अपने दोनों बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढाऊ और खुद भी पढ़ू। लेकिन अपनी दोनों इच्छायें पूरी नहीं कर पा रहीं थी। एक बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सहायता से मैं समूह से जुड़ी। जब मैंने पति को बताया तो वो बहुत नाराज हुये। उन्होने ने कहा कि जरूरते तो पूरी हो नहीं पाती, बचत कहॉं से होगी और उन्होने मुझे बहुत बुरा भला कहा। लेकिन कुछ करने की चाहत से मैं चोरी छुपे समूह की बैठक में जाने लगी। एक बार मेरे पति ने राजमिस्त्री का काम एक ठेकेदार के यहॉं किया और ठेकेदार पति से सेंटरिंग प्लेट का किराया मांगने लगा। किन्तु उनके पास पैसे नहीं थे। मैंने देखा कि वो बहुत परेशान है मैंने उनकी मदद करने को कहा तो उन्हें लगा कि ये भला मेरी मदद कैसे करेगी। मैंने समूह से 3000 रूपये लेकर उनकी मदद की और बताया कि ये समूह की मदद है मेरे पति को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होने मुझसे माफी मांगी।
    जब से मैं समूह में जुड़ी तो अपनी छोटी-छोटी बचत करके 60000 रूपये का ऋण ली और अपन दोनों बच्चो का स्कूल में एडमीशन करवाई फिर धीरे धीरे ऋण चुकौती कर दी। दूसरी बार मैं 13000 रूपये ऋण ली अपनी खुद पढ़ाई के लिये ली थी। ऋण लेकर बीए की पढ़ाई पूरी की। तीसरी बार 70000 रूपये का ऋण ग्राम संगठन से मिक्सर मशीन खरीदने के लिये ली। उसकी भी किश्त ब्याज सहित जमा कर दी। चौथी बार 100000 रूयपे का ऋण सेंटरिंग बनवाने के लिये लिया और उसे भी ब्याज सहित चुका दिया। पांचवीं बार 150000 रूपये का ऋण ली जिसमें 100000 रूपये चुका दी और 50000 ऋण बांकी है। अब आज मेरे पास 2000 वर्गफिट सेन्टिरिंग प्लेट है। जिसमे सेन्टिरिंग प्लेट एवं मिक्सर मशीन को मिला कर मेरी वार्षिक आय 204000 रूपये है और मैं सीआरपी का कार्य कर रहीं हूं।  उसमें 30000 वार्षिक आय है। आज की स्थिति में मेरी कुल आय 234000 रूपये है। मैं लखपति क्लब की सदस्य भी हूं। समूह से हम अपनी छोटी छोटी बचत और जरूरी खर्च को कम करना सीखा। समूह से ही हमारी सारी जरूरते पूरी हो जाती है।
 
नाम - आशा राठौर        
आयु - 35 वर्ष
जाति - अन्य पिछड़ा वर्ग
शिक्षा - 12वीं
समूह - कपिल स्व सहायता समूह
ग्राम संगठन - प्रकाश ग्राम संगठन
संकुल स्तरीय संगठन - प्रगति ग्राम संगठन
आंतरिक सीआरपी राउण्ड - संकुल हरदी 32, पचगांव, सूखा।
बाह्य सीआपी राउण्ड - पाली, सतना, कटनी, हरदा, टीकमगढ़, सिवनी।
(3 days ago)
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