समाचार
|| उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिये "गुरूनानक" और "रहीम" राज्य सम्मान घोषित || हर पात्र किसान को मिले ऋण माफी योजना का लाभ || आत्मविश्वास और दृढ़निश्चय से लक्ष्य भेदना आसान- मंत्री श्री पटवारी || मंत्री श्री जयवर्द्धन सिंह ने देखी ओला-प्रभावित फसल || निर्माण कार्यो में राशि का दुरूपयोग करने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध दर्ज हों अपराधिक प्रकरण || सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा जरूरी : स्पेशल डी.जी. श्री शर्मा || श्री विचित्र कुमार सिन्हा की स्मृति में पुरस्कार स्थापित करने की पहल की जायेगी || प्रदेश में धान का 21 लाख मी.टन रिकार्ड उपार्जन : मंत्री श्री तोमर || फसल ऋण माफी संबंधी कार्यक्रम तहसील स्तर पर होंगे || नई सरकार का एक और ऐतिहासिक फैसला
अन्य ख़बरें
स्कूली यूनिफॉर्म बनाने वाली ग्रामीण महिलाएँ बनी बच्चों की दीदी
-
शहडोल | 12-फरवरी-2019
 
   कल तक अपने गाँव, कस्बे में मंजू बाई, किरण बाई, सोनू बाई के नाम से जानी जाने वाली सीहोर जिले की घरेलू महिलाएँ अब मंजू दीदी, किरण दीदी और सोनू मैडम के नाम से जानी जाती हैं। इन्हें यह सम्मान स्कूली बच्चों की यूनिफॉर्म सिलाई का काम करने से मिल रहा है। ये बच्चे ही इन्हें दीदी, मैडम कह कर बुलाते हैं। ये महिलाएँ स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। इन्हें राज्य शिक्षा केन्द्र ने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत बच्चों की स्कूली यूनिफॉर्म सिलाई का काम दिया है। इस काम से ये महिलाएँ रोजाना 250 रुपये से 900 रुपये तक सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं।
   राज्य शिक्षा केन्द्र ने सीहोर जिले में ग्रामीण क्षेत्र की गरीब महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को वर्ष-2018-19 में स्कूली बच्चों की यूनिफॉर्म सिलाई का काम दिया। केन्द्र ने सर्वप्रथम सिलाई कार्य में रूचि रखने वाली और सिलाई करने वाली महिला सदस्यों का चयन किया। सभी विकासखण्डों में गठित संकुल स्तरीय संगठन (फेडरेशन) से इन महिलाओं को 15 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण के बाद सिलाई करने वाली महिला सदस्यों को बैंक से 53 लाख रुपये ऋण स्वीकृत कराकर सिलाई के लिये हाईटेक मशीनें उपलब्ध करवाई गई। साथ ही सभी महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से संगठित होकर क्लस्टर लेवल पर यूनिफॉर्म सिलाई का कार्य शुरू किया गया।
   सीहोर जिले में लगभग 2 लाख 20 हजार स्कूल यूनिफॉर्म तैयार कर स्कूल को प्रदाय करने का कार्य सिलाई सेन्टरों पर 105 स्व-सहायता समूह की 250 कार्यरत महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। इन महिलाओं द्वारा बच्चों के शर्ट, पेन्ट, ट्यूनिक, जॉकेट, सलवार, कुर्ती की सिलाई की जा रही है। इन सदस्यों को सिलाई का मानदेय काम के अनुसार दिया जा रहा है।
   ग्रामीण क्षेत्र की ये महिलाएँ देर रात तक सिलाई सेन्टर पर कार्य करती हैं और सुबह से अपने घर-परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करती हैं। सिलाई कार्य से ग्रामीण महिलाओं को समाज में एक नई पहचान मिली है।
(4 days ago)
डाउनलोड करे क्रुतीदेव फोन्ट में.
डाउनलोड करे चाणक्य फोन्ट में.
पाठकों की पसंद

संग्रह
जनवरीफरवरी 2019मार्च
सोम.मंगल.बुध.गुरु.शुक्र.शनि.रवि.
28293031123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728123
45678910

© 2012 सर्वाधिकार सुरक्षित जनसम्पर्क विभाग भोपाल, मध्यप्रदेश             Best viewed in IE 7.0 and above with monitor resolution 1024x768.
Onder's Computer