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किसान फसल विविधिकरण को अपना कर विपरीत परिस्थितियों से बचें -संभागायुक्त
फसल उत्पादन के साथ-साथ मत्स्य, पशुपालन एवं उद्यानिकी फसलें लें, जिससे आय में वृद्धि होगी -कलेक्टर, प्रशिक्षण सह कार्यशाला सम्पन्न
उज्जैन | 18-जून-2019
 
   खरीफ-2019 में बोई जाने वाली खरीफ फसलों की उत्पादकता वृद्धि के लिये प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन सोमवार 17 जून को सिंहस्थ मेला कार्यालय के सभाकक्ष में किया गया। इस अवसर पर संभागायुक्त श्री अजीत कुमार ने किसानों से अनुरोध किया कि वे अपने खेतों में फसल विविधिकरण को अपनायें, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी उनका नुकसान न हो पाये। कलेक्टर श्री शशांक मिश्र ने किसानों से अनुरोध किया कि आय को दोगुना करना है तो फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी फसलें भी करें, जिससे आय के स्त्रोत बढ़ेंगे और आय में शुद्ध लाभ बढ़ेगा। कार्यशाला में भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इन्दौर के वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक तथा कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों को फसल उत्पादन तकनीक की विस्तृत जानकारी दी गई।
   भारतीय सोयाबीन संस्थान इन्दौर के वैज्ञानिक डॉ.आरके वर्मा ने बताया कि खरीफ फसल में सोयाबीन एवं अन्य फसलों को बुवाई से पूर्व तथा बुवाई के बाद क्या-क्या सावधानियां किसानों को रखना है जैसे- बीजोपचार, अनुशंसित बीज, उर्वरक का उपयोग, पंक्ति से पंक्ति की दूरी, खरपतवार नियंत्रण, आवश्यकता अनुसार ही समय पर खरपतवारनाशी का प्रयोग किया जाये। पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ.लक्ष्मणसिंह राजपूत ने इस अवसर पर किसानों से कहा कि सोयाबीन एवं अन्य फसलों पर रोगों की पहचान एवं नियंत्रण करें। कीट वैज्ञानिक डॉ.लोकेश कुमार मीणा ने खरीफ फसलों पर किन-किन कीटों का प्रकोप होता है, उनकी पहचान तथा उनके हानि करने का तरीका, साथ ही सोयाबीन में समन्वित कीट प्रबंधन पर विस्तार से किसानों को जानकारी दी। इसी प्रकार कृषि विज्ञान केन्द्र उज्जैन के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ.आरपी शर्मा ने किसानों की आय दोगुनी करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा कर जानकारी दी। डॉ.डीएस तोमर ने किसानों से कहा कि सब-स्वाईलर के उपयोग एवं इसके लाभ के बारे में जानकारी देते हुए उन्हें किस तरह सब-स्वाईलर का उपयोग कृषि के 2-2.5 फीट तक की कठोर परत को तोड़ा जाये, ताकि भूमि के अन्दर जलधारण क्षमता में वृद्धि हो सके। कृषि विभाग के उप संचालक ने जिले के किसानों को बीजोपचार, बीज दर, संतुलित खाद उर्वरक के उपयोग, समन्वित कीट नियंत्रण आदि विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में कृषि विभाग के समस्त कृषि अधिकारी, अनुविभागीय कृषि अधिकारी, सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, बीटीएम, एटीएम, जिले के किसान और प्रगतिशील किसान प्रमुख रूप से उपस्थित थे।   
(36 days ago)
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