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नोवल कोरोना वायरस : बचाव ही उपाय (विशेष आलेख)
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छिन्दवाड़ा | 21-मार्च-2020
 
   
    स्वास्थ्य ही धन है और स्वस्थ व्यक्ति ही प्रसन्न रहकर अपना जीवनयापन कर पाता है। वर्तमान में नोवल कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस नये वायरस के बारे में भी व्यक्ति के पास सामान्य जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। नोवल कोरोना वायरस जिसे कोविड-19 भी कहते हैं, यह संक्रमित इंसान से स्वस्थ इंसानों में आंख, नाक और मुंह के रास्ते खांसने या छींकने या संक्रमित हाथों से वस्तुओं को छूने पर फैलता है। यह विषाणु किसी भी सतह पर 24 से 48 घंटे तक ही जीवित रह सकता है। यह एक नया वायरस है और इसके प्रति हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बिल्कुल नहीं है। मुख्य रूप से यह हमारे श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। कोरोना माइक्रोस्कोप में देखने पर यह वायरस मुकुट या ताज की तरह दिखाई देता है इसलिये इस नोवल कोरोना वायरस को कोविड-19 नाम दिया गया है। इस वायरस के किसी जानवर के माध्यम से मानव शरीर में प्रविष्ट होना संभावित है।
      भारत में वर्तमान में नोवल कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या लगभग 826 पाई गई और 3 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है। लगभग 138 करोड़ जनसंख्या वाले इस देश में अगर इस विषाणु का प्रसार हो गया तो इसकी रोकथाम और नियंत्रण अत्यधिक कठिन हो जाएगा। इसका पहला मरीज चीन के वुहान शहर में माह दिसंबर 2019 में पाया गया था। माह दिसंबर 2019 से मार्च 2020 तक पहले मरीज से लेकर लगभग एक लाख 25 हजार 48 व्यक्तियों के रक्त की जांच में यह पॉजीटिव पाया गया है और 4 हजार 613 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। विश्व के लगभग 170 देश में इसका संक्रमण देखा गया है। इस बीमारी का कोई टीका या निर्धारित औषधि नही है, इसलिये इसे जानकारी और सावधानी से ही रोका जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 की संक्रमण क्षमता अधिक है, परंतु निम्न घातकता 2.1 प्रतिशत है जो कि एस.ए.आर.एस. (2003) की 10 प्रतिशत घातकता और एम.ई.आर.एस.(2012) की 35 प्रतिशत की घातकता से काफी कम है।     
    बचाव के उपाय- नोवल कोरोना वायरस से बचाव के लिये भीड-भाड़ वाली जगहों जैसे सिनेमाघरों, शॉपिंग मॉल, स्विमिंग पूल इत्यादि पर जाने से बचना चाहिये। अगर जाना आवश्यक हो तो मुंह पर मास्क या एक साफ रुमाल को अच्छे से बांधकर ही जाना चाहिये। अपने हाथों से अपने नाक, मुंह या चेहरे को बार-बार नहीं छूना चाहिये एवं अपने हाथों को साबुन और पानी की सहायता से कम से कम 20 सेकेंड तक अच्छी तरह से धोना चाहिये। अगर पानी व साबुन नहीं हो तो अल्कोहल बेस हैंड सेनेटाइज़र से हाथ साफ करना चाहिये। साथ ही अपने व्यक्तिगत रोज़मर्रा में उपयोग में आने वाली वस्तुओ जैसे मोबाइल, रिमोट, पर्स इत्यादि को भी अच्छे से साफ करते रहना चाहिये। जहाँ तक संभव हो सके घर का बना ताज़ा खाना और अन्य खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल करना चाहिये। मार्केट में उपलब्ध खुली खाद्य सामग्री का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये। दूसरे शहरों/राज्यों में जाने से बचने के साथ ही अगर अत्यंत महत्वपूर्ण हो तो पूर्ण सावधानी और स्वयं को सुरक्षित रखते हुये समुचित उपाय के बाद ही प्रस्थान करना चाहिये। पर्याप्त पानी का सेवन करना चाहिये। अगर किसी व्यक्ति में सर्दी जुकाम की तरह लक्षण हो तो उससे एक मीटर की दूरी बनाये रखे और संक्रमित व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाई गई वस्तुओं को नहीं छुये। अगर आप स्वयं ग्रसित है तो मास्क या रुमाल का उयोग करे। बार-बार साबुन पानी से हाथ धोये या सेनेटाइजर से साफ करें। खांसते या छीकते समय अपनी कोहनी या रुमाल/टिशू पेपर अपने मुंह के पास रखे। लोगों से हाथ मिलाने से बचे। इस वायरस का संक्रमण छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों, धात्री एवं गर्भवती माताओ के अलावा कम प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को जल्दी हो सकता है, अतः इन्हें दूर रखना चाहिये। जिला अस्पताल से संबध्द मेडिकल कालेज में एक बाह्य रोगी विभाग के कमरे में रोज़ाना विशेषज्ञ अपनी सेवायें नियमित रूप से दे रहे हैं। सर्दी जुकाम या बुखार होने पर तत्काल विशेषज्ञ को दिखाकर अपना उपचार कराना चाहिये।  
      अफवाहों से बेहतर है कि सही जानकारी और स्वयं को सुरक्षित रखने के उपायों और सुरक्षा साधनों के उचित इस्तेमाल से स्वयं एवं अपने परिवार जनों को सुरक्षित रखें। सन्देह होने पर केवल रजिस्टर्ड चिकित्सक या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से सम्पर्क करना चाहिये। जिला प्रशासन स्तर पर मरीजों के उपचार की पूर्ण व्यवस्था की गई है एवं जिला चिकित्सालय से सम्बध्द मेडिकल कालेज में सभी आवश्यक तैयारी की जा चुकी हैं। मरीजों को बिना देर किये अपना उपचार कराना चाहिये और स्वयं स्वस्थ रहकर दूसरों को भी स्वस्थ रहने के लिये प्रेरित करते रहना चाहिये।   
आलेख-राजेश शाही, नोडल अधिकारी
छिन्दवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस
(111 days ago)
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