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किसान भाईयों को टिड्डी दल से बचाव के लिए सलाह
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डिंडोरी | 29-मई-2020
   गुरूवार को कलेक्टर सभागार में जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें टिड्डी नियंत्रण दल गठन पर चर्चा की गई एवं कलेक्टर महोदय द्वारा टिड्डी से होने वाले नुकसान एवं नियंत्रण के बारे में जिला स्तरीय दल गठन की कार्यवाही की गई एवं टिड्डी से होने वाले नुकसान पूर्व सजग रहने के लिए निर्देशित किया गया।  उपसंचालक कृषि श्री पी.डी. सराठे द्वारा बताया गया कि ये दल जब किसी क्षेत्र में शाम 6:00 बजे और 8:00 बजे के बीच में पहुंचते हैं तो रातभर वही पर फसलों एवं वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाते हैं टिड्डी एक सर्वभक्षी कीट होने से किसी भी स्तर पर हानि पहुंचा सकता है तथा आक्रमण कर फसलों/वनस्पितियों को भारी मात्रा में हानि पहुंचता है। सामान्यत: टिड्डी दल दिन में भ्रमण करने के साथ नुकसान करते हुए हवा के बहाव की दिशा में आगे बढ़ता रहता है तथा शाम में 7:00 बजे से प्रात: 7:00 बजे तक किसी जगह पर ठहरता हैं। इसके नियंत्रण  के लिए रात्रि विश्राम वाले स्थान पर रात 12:00 बजे से प्रात: 6:00 बजे तक निष्क्रीय अवस्था में रहता है इस समय नियंत्रण हेतु कीटनाषक के स्प्रे की कार्यवाही करना चाहिए अत: सावधान रहें एवं फसलों के बचाव हेतु सामूहिक रूप से तत्पर रहें। टिड्डी दल का आकार 1.5 से 2 कि.मी. लम्बाई एवं चौड़ाई में विचरण करता है एक जगह पर रात्रि विश्राम करने पर हजारों की संख्या में अण्डे देकर अगले स्थान के लिए प्रस्थान करता है। इस प्रकार हर रोज हजारों की संख्या में इनकी वृद्धि कर नये-नये दल गठित कर परेषानी पैदा करती है तथा इनके बहुत अधिक संख्या में अकाल की स्थिति निर्मित हो सकती है। यद्यपि इस समय खेतो में अधिक फसलें नहीं है फिर भी सब्जी एवं फल तथा उउ़द मूंग की फसल है।
    जिससे समय रहते टिड्डी दल प्रकोप से बचाव के समुचित उपाय एवं व्यापक प्रचार-प्रचार किया जा रहा है। इनके लिए गांवों में मुनादी कर किसानों को जानकारी दी जाकर टिड्डियों को टेªक्टर के सायलेंसर निकालकर आवाज करना पारम्परिेक उपाय जैसे शोर करना, ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग तथा ढोलक, डीजे, ट्रेक्टर का सांइलंेसर निकाल कर आवाज करना एवं टीन के खाली डिब्बे बजाने चाहिए यह  शोर वाले स्थानों पर बैंठने से बचता है। तेज ध्वनि से यह दल नीचे (जमीन) ना आ कर दूसरे स्थान पर निकल जाते हैं। यदि यह दल रात में रूक जाता हैं तो ट्रेक्टर चलित पावर स्प्रे पंपो से क्लोरोपायरीफास 20 ई.सी. दवा 1200 मिली. अथवा डेल्टामेथ्रीन 2.8 प्रतिशत ई.सी. 600 मिली. अथवा लेम्डासाइलोथ्रिन 5 प्रतिशत ई.सी. दवा 400 मिली. प्रति हेक्टेयर की मान से स्प्रे करना चाहिए  साथ ही पाउडर रूपी दवा में क्यूंनालफास 1.5 डी.पी. अथवा फेनवेलरेट 0.4 प्रतिशत डी.पी. दवा पाउडर प्रति हेक्टेयर 25 किग्रा. की दर से छिड़काव करें। सामान्यत: टिड्डी दल द्वारा दिन में भ्रमण के साथ नुकसान करते हुए हवा के बहाव की दिशा में आगे बढ़ता रहता हैं तथा रात्रि में 7:00 बजे से प्रात: 7:00 बजे तक किसी जगह पर ठहरता हैं। इसके नियंत्रण  के लिए रात्रि विश्राम वाले स्थान पर रात 12:00 बजे से प्रात: 6:00 बजे तक कीटनाशक दवा स्प्रे की कार्यवाही की जाती हैं अथवा फायर ब्रिगेड से पानी की तेज धार डाली जाती है तो यह मर जाता है अत: सावधान रहें एवं फसलों के बचाव हेतु सामूहिक रूप से तत्पर रहें।
    अत: जिले के समस्त किसान भाई एवं बहनों को सलाह दी जाती है कि आस-पास टिड्डी दल दिखे तो उपरोक्तानुसार बताये गये समाधान का उपयोग कर टिड्डियों पर नियंत्रण पायें एवं अपने नजदीकी कृषि विभाग फोन नंबर 9926009782, एवं राजस्व विभाग के अधिकारी से संपर्क करें।

 
(34 days ago)
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