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नौजवान डॉक्टर ने कोरोना को हराया, महीने भर तक जिंदगी और मौत के बीच करते रहे संघर्ष (सफलता की कहानी)
उज्जैन के आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर इलाज करने के दौरान हुए थे संक्रमित, 6 महीने के बच्चे से एक-दो बार ही हुई मुलाकात, डिस्चार्ज होते ही देंगे अब पीजी की एक्जॉम
इन्दौर | 26-जून-2020
   उज्जैन के आर.डी.गार्डी मेडिकल कॉलेज में एक डॉक्टर कोरोना संक्रमितों के इलाज के दौरान खुद कोरोना की चपेट में आ गए। इलाज के दौरान कई बार डॉक्टर की हालत नाजुक हो गई थी। उनका बच पाना मुश्किल था। इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में एक महीने तक संक्रमित डॉक्टर ज़िंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे। पीडित डॉक्टर का 6 महीने का बेटा है। डॉक्टर एक-दो बार ही अपने बेटे से मिले हैं। अंतत: एक महीने की लंबी लड़ाई के बाद डॉक्टर ने जिंदगी की जंग जीत ली।
      डॉ.विग्रह (परिवर्तित नाम) पेशे से उज्जैन के आर.डी.गार्डी मेडिकल कॉलेज में रेसिडेंट डॉक्टर और पीजी थर्ड ईयर के स्टूडेंट हैं। छह महीने के बेटे, पत्नी और माता-पिता और भाई से दूर डॉ. विग्रह विपरीत हालातों में अपने ड्यूटी पर डटे रहे। आर.डी.गार्डी अस्पताल में कोरोनो मरीजों का कई दिनों तक इलाज करते रहे। इलाज करते-करते वे खुद संक्रमित हो गए। उन्हें उसी अस्पताल में भर्ती किया गया। साँस लेने में तकलीफ होने लगी। उनकी रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव निकला। उन्हें गंभीर अवस्था में इलाज के लिए इंदौर के अरबिंदो अस्पताल लाया गया। यहां हालात इतने पेचीदा हो गए कि कुछ दिनों तक तो लगा शायद विग्रह का ज़िंदा बच पाना अब मुमकिन नहीं है उन्हें कोरोना संक्रमण के दौरान कई तरह की बीमारियों ने घेर लिया था। संक्रमण की वजह से फेफडे, हार्ट और शुगर जैसी बीमारियां शरीर में दस्तक दे चुकी थी। कई बार तो लगा कि ऑक्सीजन की नली अब कभी निकल पाएगी भी या नहीं।
      डॉ. विग्रह ग्वालियर के रहने वाले हैं। उज्जैन के आर.डी.गार्डी मेडिकल कॉलेज से एमडी (मेडिसिन) कर रहे हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर वाकई भगवान होते हैं। यह उनके लिए नई ज़िंदगी है। वो अपनी ज़िंदगी की नई शुरुआत करेंगे। उनकी परीक्षा है। वे परीक्षा देकर फिर अपनी ड्यूटी निभाएंगे। उनकी माँ शोभा (परिवर्तित नाम) कहतीं हैं कि यह दौर बहुत  कठिन था। बेटे विग्रह ने बहुत हिम्मत से काम लिया। हम लोग बार-बार भावुक तो हो जाते थे लेकिन हिम्मत से कोरोना से जंग लड़ते रहे। विग्रह अपनी ड्यूटी का पक्का है वह अपने 6 महीने के बेटे से भी एक-दो बार ही मिला है। मुझे अपने बेटे पर गर्व है। भाई नवीन (परिवर्तित नाम)   कहते हैं कि भाभी और पूरे परिवार को संभालन के साथ उन्होंने भाई के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। वक्त रहते इलाज मिलने से उनके भाई को नया जीवन मिल गया। 
      इंदौर के अरबिंदो अस्पताल से डॉ विग्रह गुरुवार को डिस्चार्ज हो गए। अस्पताल के चेयरमेन डॉ विनोद भंडारी का कहना है कि डॉ विग्रह को बचाना उनके लिए एक चैलेंज था जिसे उन्होंने पूरा किया। इन्हें कोरोना के दौरान सभी तरह के कॉम्पलिकेशन हो गए थे। हमारे डॉक्टर्स और स्टॉफ ने भले ही मेहनत की हो लेकिन इनका बच पाना ईश्वर के चमत्कार जैसा है।
 
(44 days ago)
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