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जिले के 5 विकासखंडों में स्व-सहायता समूहों की दीदीयां तैयार करेंगी पौधों की नर्सरी
करीब ढाई करोड़ की लागत से तीन वर्षों में तैयार होंगे 9 लाख पौधे
मण्डला | 02-जुलाई-2020
जिले में उद्यानिकी एवं वानिकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनांतर्गत स्व-सहायता समूहों की भागीदारी से दो करोड़ 59 लाख रुपए की अनुमानित लागत से पौधों की नर्सरी विकसित करने की कार्ययोजना पर अमल शुरू किया गया है। स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की इस अभिनव कार्य योजना से अगले तीन वर्षों में 8 लाख 75 हजार पौधे तैयार होंगे।
स्वयं सहायता समूह की दीदीयों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जबलपुर जिले के 5 विकासखंडों में मनरेगा योजनानंतर्गत पौधों की नर्सरी को विकसित करने का कार्य स्व-सहायता समूहों से कराया जायेगा।
मध्यप्रदेश दीनदयाल अंत्योदय राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक आजीविका डीपी तिवारी ने बताया कि विकासखंड जबलपुर के ग्राम पंचायत जोगीढ़ाना में पौधों की नर्सरी विकसित करने का कार्य आशीर्वाद स्व-सहायता समूह करेगा। जबकि विकासखंड मझौली के ग्राम पंचायत सिमरिया में नर्सरी पौधारोपणी तैयार करने का काम मां गायत्री स्व सहायता समूह को दिया गया है।
इसके अलावा विकासखंड पनागर के ग्राम पंचायत कालाडूमर में नर्सरी विकास कार्य अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह, विकासखंड पाटन के ग्राम पंचायत पौड़ी छपरी में नर्सरी विकसित करने का कार्य लक्ष्मी स्व-सहायता समूह करेगी। जबकि विकासखंड शहपुरा के ग्राम पंचायत बरखेड़ा में नर्सरी विकास कार्य आजीविका स्व-सहायता समूह द्वारा किया जायेगा।
जिला आजीविका प्रबंधक श्री तिवारी ने बताया कि प्रत्येक नर्सरी की कार्ययोजना तीन वर्षों की है। एक नर्सरी से तीन वर्ष में एक लाख 75 हजार पौधे तैयार होंगे। इस प्रकार पांचों नर्सरियों को मिलाकर कुल 8 लाख 75 हजार पौधे तैयार होंगे।
नर्सरियों में फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों के आम, सीताफल, जामुन, करंज, गुलमोहर, आंवला, अमरूद, कटहल, चीकू, अनार और स्थानीय परिस्थितियों में तेजी से तैयार होने वाले पौधों को तैयार करने में प्राथमिकता दी जायेगी।
प्रत्येक नर्सरी में प्रथम वर्ष एक लाख 25 हजार पौधे तथा दूसरे और तीसरे वर्ष में 25-25 हजार पौधे तैयार किये जायेंगे। इस प्रकार हर नर्सरी से अगले तीन वर्षों में एक लाख 75 हजार पौधे तैयार हो जायेंगे। मनरेगा के परियोजना अधिकारी संदीप श्रीवास्तव बताते हैं कि पौधों के नर्सरी विकास कार्य से स्व-सहायता समूहों की 65 दीदीयों को सालभर काम मिलेगा। इसमें प्रत्येक परिवार को तीन वर्षों तक मनरेगा योजना से 100 दिन का रोजगार प्राप्त होगा। इसके अलावा पौधों की बिक्री से जो आमदनी प्राप्त होगी वह स्वयं सहायता समूह एवं संबंधित ग्राम पंचायत के मध्य 70 और 30 के अनुपात में बांटी जायेगी।

(33 days ago)
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