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परंपरागत खेती में बदलाव कर पाटीदार ने बंजर जमीन पर सीताफल का बगीचा लहलहा दिया "सफलता की कहानी "
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धार | 30-जुलाई-2020
   धार जिले के मनावर के ग्राम देदला के युवाओं की सोच अब परंपरागत खेती में बदलाव कर रही है। इसी कड़ी में ग्राम देदला के युवा किसान क्षितिज पाटीदार ने अपनी पुष्तैदी बंजर जमीन पर मेहनत का पसीना बहाया और 22 बीघा में जैविक सीताफल बगीचा लहलहा दिया। उसने वर्ष 2016 में मेहनत षुरू की थी, आज छह हजार पौधों का बगीचा तैयार है। इस बार सीताफल की पैदावार भी जोरदार होने की संभावना है।
   मनावर तहसील के ग्राम देदला के 30 वर्षीय किसान क्षितिज पाटीदार बरसों से परिवार की बंजर भूति को लेकर परेषान थे। वे सोच रहे थे कि इसे किस तरह लाभदायक बनाया जाए। अचानक विचार आया कि बंजर भूमि में सीताफल की पैदावार ली जा सकती है। बस फिर क्या था वर्ष 2016 में जमीन को थोड़ा-बहुत सुधारा और जैविक पद्धति से सीताफल के पौधे तैयार कर रोप दिए।
   खेत के कुएं में बारिष में ही कुछ माह पानी रहता है। ऐसे में मनावर से टैंकरों के माध्यम से पानी लाकर पौधों की प्यास बुझाई। अब छह हजार पौधे विकसित हो चुके हैं और फल भी देने लगे हैं। गत वर्ष बड़ी मात्रा में सीताफल मिले थे, लेकिन इस वर्ष अक्टूबर में जोरदार पैदावार होने की संभवना है। वे कहते है कि आगामी कई वर्षो तक उद्यान से हमें सीताफल मिलते रहेंगे और लाखों की कमाई भी होगी।
सीताफल का नाम दिया महाराजा
पाटीदार ने बताया कि हमने अपनी जमीन में उपजाए सीताफल को महाराजा नाम दिया है। पिछले साल सीताफल की पैदावार कम हुई थी। इसलिए स्थानीय बाजार में ही बेच दिया था। इस बार अच्छी पैदावार होने की उम्मीद के चलते महाराष्ट्र और अन्य स्ािानों की बड़ी फर्मो से बिक्री के लिए सम्पर्क किया है। कोरोना महामारी की वजह से थोड़ी दिक्कत आ रही है।
अंतरवर्तीय फसले भी ले रहे पाटीदार
पाटीदार ने बताया कि खेती की मिट्टी को सुधारने का एक और बड़ा लाभ भी हुआ है कि हम अंतरवर्तीय फसले ले पा रहे है। चार साल में उद्यान विकसित करने के साथ-साथ पैड़ों के बीच की खाली पड़ी भूमि में अन्य फसलें उगा कर खर्च निकालने लायक बना लिया है। वर्तमान में इस जमीन में सोयाबीन बोया गया है।
 
(54 days ago)
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