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कृषकों को जैविक विधियों से कीट नियंत्रण की दी गयी जानकारी
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पन्ना | 05-अगस्त-2020
      राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत आयोजित समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन सोयाबीन के कृषकों हेतु कृषक प्रशिक्षण का आयोजन ग्राम बमरहिया, देवेन्द्रनगर पन्ना में किया गया। डॉ. आशीष त्रिपाठी वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना द्वारा कृषकों को जैविक कीट नियंत्रण की विभिन्न विधियों के बारे में विस्तार से बताया। जिन क्षेत्रों में वर्षा की कमी है वहां पर किसान भाई निंदाई गुड़ाई कर खरपतवारों को अलग कर जमीन की पपडी तोडें जिससे नमी का संरक्षण होगा।

    उन्होंने फेरोमेन ट्रेप का उपयोग कर कीट निगरानी व नियंत्रण के बारे में बताया साथ ही नीम का तेल 5 प्रतिशत छिड़काव करने अथवा विवेरिया बेसियाना जैविक कीटनाशी के छिड़काव की सलाह दी। डॉ. आर0के0 जायसवाल ने उड़द में पीला मोजेक रोग के नियंत्रण हेतु रोग ग्रस्त पौधे उखाड़कर नष्ट करने व थायोमेथाक्जाम 25 प्रतिशत अथवा एसिटामिप्रिड 20 प्रतिशत की 50 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ छिड़काव की सलाह दी। उन्होंने धान में रोगों से बचाव हेतु नर्सरी से पौधे उखाड़ कर फफूंदनाशी दवा स्ट्रेप्टोसाईक्लिन 2.5 ग्राम 10 लीटर पानी में घोल बनाकर उपचार करके लगायें जिससे जीवाणुजनित बीमारियों से बचाव होगा तथा ट्राईसाईक्लाजोल 02 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर जडों का उपचार करने से फफूंद जनित बीमारियों से बचाव होगा।

    श्री रितेश बागोरा ने खरीफ फसलों में पौध वृद्धि हेतु एन.पी.के. 18-18-18 छिड़काव की सलाह दी। उन्होंने कृषकों को समझाईश दी कि सोयाबीन एवं उड़द की खड़ी फसल में यूरिया का उपयोग न करें क्योंकि इनकी जड़ों में नत्रजन स्थरीकरण की ताकत होती है तिल की फसल में 10-15 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ के मान से 30-35 दिन की अवस्था में अवश्य डाले जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होने के साथ साथ उत्पादन में भी वृद्धि होगी। चयनित कृषकों को फेरोमेन ट्रेप, जैविक कीटनाशी व एन.पी.के. का वितरण किया।
 
(49 days ago)
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