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प्राचीन काल से आदिवासियों का जंगल और वन्यप्राणियों से गहरा लगाव रहा है: आदिम जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह
मंत्री सुश्री मीना सिंह ने शुक्रवार को वनाधिकार अधिनियम एवं विभागीय कार्यों की समीक्षा की
डिंडोरी | 07-अगस्त-2020
     प्रदेश शासन के आदिम जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि प्राचीनकाल से आदिवासियों का जंगल एवं वन्यप्राणियों से गहरा लगाव रहा है। आदिवासी प्राचीनकाल से वन क्षेत्रों में निवास करते हुए जल, जंगल, जमीन और वन्य प्राणियों की रक्षा की है। यही वजह है कि आदिवासी क्षेत्रो में वन एवं वन्यप्राणियों की भरमार है। प्रदेश सरकार की मंशा है कि वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत पात्रताधारी सभी आदिवासियों को वनाधिकार हक प्रमाण पत्र मिले। इस कार्य के लिए गठित समितियां वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त दावा प्रकरणों पर सूक्ष्मता से जांच पडताल कर वनभूमि पर काबिज लोगों को वनाधिकार हक प्रमाण पत्र देने की कार्यवाही करें। आदिम जाति कल्याण मंत्री सुश्री मीना सिंह शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में वनाधिकार अधिनियम एवं आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा कर रही थी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति ज्योतिप्रकाश धुर्वे, जिला भाजपा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र राजपूत, कलेक्टर श्री बी. कार्तिकेयन, पुलिस अधीक्षक, वन संरक्षक, जिला पंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी, एसडीएम डिंडौरी, एसडीएम शहपुरा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग, कार्यपालन यंत्री पीआईयू सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।
    मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वनभूमि पर काबिज परिवारों को वनाधिकार हक प्रमाण पत्र प्रदान कर, सभी को चिंतामुक्त करने का निर्णय लिया है। सभी अधिकारी वनाधिकार अधिनियम के दावा प्रकरणों के निराकरण में संवेदनशीलता के साथ काम करें और सभी प्रकरणों का निराकरण समय-सीमा में करें। मंत्री श्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि दावा प्रकरण के निराकरण में गांव के दो बुजुर्गों के कथन दर्ज कर साक्ष्य के रूप में लेने का प्रावधान है। वनभूमि पर काबिज होने के साक्ष्य के रूप में दो बुजुर्गों के कथन मिलने पर वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत वनाधिकार हक प्रमाण पत्र देने की कार्यवाही की जाए। उन्होंने एसडीएम एवं एसडीओ वन सहित सभी मैदानी अमले को वनाधिकार अधिनियम के प्रकरणों के निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। वन संरक्षक ने बताया कि जिले में वनाधिकार हक प्रमाण पत्र के लिए प्रस्तुत दावों की संख्या 4 हजार 865 है। सभी प्रकरणों का ग्राम वन अधिकार समिति, उपखण्ड स्तरीय समिति तथा जिला स्तरीय समिति के माध्यम से निराकरण कर लिया जायेगा। उन्होंने बताया कि प्रस्तुत दावों में नाबालिक, परिवार सदस्यो के द्वारा दोहरा आवेदन, साक्ष्य या अभिलेखों का नहीं होना, मौके पर कब्जा नहीं होना एवं पलायन के संबंध में प्रकरण दर्ज है। सभी प्रकरणों का जांच परीक्षण कर निराकरण किया जा रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति ज्योतिप्रकाश धुर्वे ने कहा कि वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत ग्राम छीरपानी, बावली, खुरखुरीदादर में वनभूमि पर काबिज लोगों को भी वनाधिकार हक प्रमाण पत्र की देने की कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि वन विभाग के अधिकारी वनभूमि पर काबिज लोगों के प्रति सहयोगात्मक रूप से काम करें।
    मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि बस्ती विकास योजना के अंतर्गत आवंटित राशि का व्यय जन कल्याणकारी कार्यो में करें। बस्ती विकास योजना की राशि से गांवों में सामुदायिक भवन, छात्रावास भवन, किचनशेड एवं बाउंड्रीवाल निर्माण के कार्यो को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक कार्यो की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी की जाए, जिससे निर्माण कार्यो की स्थिति एवं गुणवत्ता का पता चल सके। मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि आहार अनुदान योजना के अंतर्गत डिंडौरी जिले में निवासरत बैगा परिवार की मुखिया महिलाओं को एक हजार रूपए प्रतिमाह प्रदान किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि आहार अनुदान योजना के अंतर्गत कोई भी बैगा परिवार की मुखिया महिला वंचित नहीं होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करें कि इस योजना का लाभ सभी हितग्राहियों को मिले।
    मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिले इसके लिए छात्रवृति, आवास सहायता, गणवेश, पाठ्य-पुस्तकें एवं निःशुल्क साईकिलें प्रदान की जाती है। जिससे सभी स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके। उन्होंने कक्षा 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के परीक्षाफल की जानकारी ली। बोर्ड परीक्षा में जिले का बेहतर परीक्षा फल होने पर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग को बधाई दी। मंत्री सुश्री मीना सिंह ने जिले में निर्माणाधीन शिक्षा परिसर, विद्यालय, छात्रावास एवं आश्रम शालाओं के निर्माण कार्यो की प्र्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण करा लिया जाए। कार्यपालन यंत्री पीआईयू ने कहा कि सभी निर्माण कार्य जनवरी 2021 तक पूर्ण कर लिये जायेंगे।
    मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि आदिवासियों मे अपनी संस्कृति को लेकर गहरा लगाव रहता है। अतः डिंडौरी जिले में आदिवासी संस्कृति को बढावा दिया जाए। इससे जिले में आदिवासियों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने आदिवासी संस्कृति के अनुरूप कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए भोपाल मुख्यालय में आदिवासी संस्कृति पर आधारित म्यूजियम बनाया गया है। पर्यटक वहां पर जाकर आदिवासी संस्कृति से अवगत होते हैं। डिंडौरी जिला आने पर पर्यटक वास्तविक आदिवासी संस्कृति से अवगत हो सकेंगे। मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को सिलाई करने का प्रशिक्षण दिया जाए। प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को स्कूलों से गणवेष सिलाई का कार्य दिया जाए। जिससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिले और वह आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने इस अवसर पर जल, जीवन मिशन की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत पेयजल संकट वाले गांवों को अनिवार्य रूप से जोडा जाए। बैगा क्षेत्र के गांवों को विशेष प्राथमिकता देने की बात कही गई। मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि कोदो-कुटकी फसल डिंडौरी जिले की प्रमुख फसल है। उन्होंने कोदो-कुटकी फसल के लिए मार्केटिंग तैयार करने के निर्देश दिए। जिससे डिंडौरी जिले के किसान अधिक से अधिक मात्रा में कोदो-कुटकी फसल का उत्पादन कर मुनाफा कमा सकें।

 
(43 days ago)
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