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जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2437 समूह गठित
सैलाना-बाजना क्षेत्र में 8 समूहों द्वारा मुर्गीपालन द्वारा आजीविका अर्जित की जा रही है
रतलाम | 24-अक्तूबर-2020
   राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रतलाम जिले में 2437 महिला स्वसहायता समूह का गठन किया गया है। समूहों को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक जीवन को उच्च स्तर पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। समूह की महिलाओं द्वारा आर्थिक गतिविधियों से अपने परिवार की आमदनी में इजाफा किया जा रहा है। जिले के सैलाना तथा बाजना विकासखंडों में 8 समूहों द्वारा मुर्गीपालन का कार्य आरंभ किया गया है जिससे उनको अच्छी आमदनी हो रही है।
   सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप केरकेट्टा ने बताया कि समूह के लिए मनरेगा योजना से मुर्गीपालन शेड निर्मित कराए गए हैं। शेड निर्माण पूरा होने के बाद मुर्गीपालन का प्रशिक्षण चिकन चूजो के लिए बैंक से ऋण दिलवाने में भी सहयोग दिया गया है। चावड़ाखेड़ी के गणपति स्वयं सहायता समूह को भारतीय स्टेट बैंक सैलाना से 1 लाख रूपए का ऋण दिलाया गया और ग्राम संगठन से भी उसे 70 हजार रूपए का ऋण दिया गया। ग्राम संगठन अपर स्तर का संगठन होता है जो सहायता समूह के चुनिंदा सदस्यों को मिलाकर बनाया जाता है जो समूहों की गतिविधियों के आधार पर उसको सहायता उपलब्ध कराता है। ग्राम संगठन को शासन द्वारा राशि उपलब्ध कराई जाती है। चावड़ाखेड़ी के गणपति स्वयं सहायता समूह की सदस्य श्रीमती हीराबाई पति मानजी को समूह ने 17 हजार रूपए चूजा दाना के लिए और उपकरण लाने के लिए ऋण दिया। हीरा ने 35 रूपए प्रति किलो की दर से 200 चूजे बाजार से खरीदे और उनके दाना पानी के उपयोग के लिए उपकरण भी खरीदे।
   मुर्गीपालन का काम शुरू करने की एक माह बाद हीराबाई द्वारा घर पर ही 195 मुर्गियां 250 से 300 रुपए प्रति मुर्गी की दर से बेची गई। मुर्गियां बेचकर हीराबाई को 40 हजार 627 की राशि मिली जिससे हीराबाई को 30 हजार से 35 हजार रुए की आमदनी हुई है। अब हीराबाई ने दूसरी बेच के 200 चूजे लाकर शेड्ड में रखे हैं। 20 दिनों बाद इन मुर्गियों का वजन 500 से 600 ग्राम हो गया है। आने वाले 10-15 दिनों में हीराबाई पुनः मुर्गियों को बेचकर आमदनी प्राप्त करेगी। अब जिले के प्रत्येक विकासखंड में 50-50 समूह सदस्यों को जिला पंचायत द्वारा मुर्गीपालन से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है और जिले में मिशन स्टाफ द्वारा 50-50 समूह सदस्यों को मुर्गीपालन के लिए चयनित भी कर लिया गया है।
   एनआरएलएम के जिला समन्वयक श्री हिमांशु शुक्ला ने बताया कि बाजना विकासखंड के ग्राम ठिकरिया में सरस्वती स्वसहायता समूहके जीवा पिता बहादुर, जय माता दी स्वसहायता समूह की भूली सुखराम, चावड़ाखेड़ी के गणपति सहायता समूह की हीरा मांनजी के अलावा सुगना देवचंद, भूरी मंजी, कांताबाई राजेश, बाजना के ग्राम ठिकरिया के कालिका स्वसहायता समूह की निरमा दिलीप तथा चावड़ाखेड़ी के गंगा माता स्वसहायता समूह के ताजू दिनेश के घर पर शेड निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और इन्होंने गतिविधि आरंभ कर दी है।
(40 days ago)
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