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स्थानीय उत्पादों को निर्यात योग्य बनाने एवं माँग स्थापित करने हेतु संस्थागत रूप से किए जाएँगे प्रयास
स्वसहायता समूहों को सीधे रूप से किया जाएगा सम्बद्ध बिजनेस मॉडल पर विशेषज्ञों से हुई गहन चर्चा, स्थानीय विशेषताओं, व्यापकता एवं आर्थिक क्षमता की आधार पर किया गया है ‘‘एक जिला एक उत्पाद’’ के उत्पादों का चयन
अनुपपुर | 04-जनवरी-2021
    ‘‘एक जिला एक उत्पाद’’ अंतर्गत चयनित स्थानीय उत्पादों को निर्यात योग्य बनाने एवं माँग में वृद्धि उत्पन्न कर स्थानीय निवासियों की आजीविका में सकारात्मक सुधार करने हेतु कलेक्ट्रैट कार्यालय नर्मदा सभागार में आयोजित बैठक में कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर ने सम्बंधित विभागीय अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों की उपस्थिति में अब तक की गयी गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान चिन्हित उत्पादों के प्रोत्साहन हेतु शासकीय अंतःक्षेपों के सम्बंध में विमर्श किया गया।
             उल्लेखनीय है ‘‘एक जिला- एक उत्पाद’’ अंतर्गत जिले में चार उत्पादों गुलबकावली अर्क, शहद, कोदो चावल एवं टमाटर का चयन किया गया है। उत्पादों का चयन स्थानीय विशेषताओं, व्यापकता एवं आर्थिक क्षमता को मद्देनजर रखते हुए किया गया है। बैठक में प्रत्येक उत्पाद के बिजनेस मॉडल के सम्बंध में विषय विशेषज्ञों के साथ मंथन किया गया एवं शासकीय अंतःक्षेपों के प्रकार एवं स्तर पर चर्चा की गयी। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक मॉडल में स्थानीय स्वसहायता समूहों को इस प्रकार सम्बद्ध किया जाय कि एक सस्टेनेबल एवं आत्मनिर्भर गतिविधि का सृजन हो तथा सप्लाई एवं वैल्यू चेन में स्थानीय निवासियों की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके। आपने कहा उत्पादों के प्रसार में उत्पादक भी स्थानीय निवासी हो एवं विक्रेता भी। इस हेतु आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था के कलेक्टर ने निर्देश दिए।
गुलबकावली के स्वास्थ्य लाभों के सम्बंध में की जाएगी वैज्ञानिक शोध
   अमरकंटक की वादियों में प्राकृतिक रूप से उत्पादित गुलबकावली पुष्प जिसका अर्क नेत्रों के विकार में बहुत लाभदायक है का चयन ‘‘एक जिला- एक उत्पाद’’ के लिए किया गया है। कलेक्टर श्री ठाकुर ने कहा कि गुलबकावली अर्क की विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए वैज्ञानिक शोध महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उपयोग के प्रकार एवं डोज के सम्बंध में प्रतिष्ठित चिकित्सकों/ आयुर्वेदाचार्यों के अभिमत भी शामिल किया जाना उत्पाद की व्यापकता में सहायक होगा। श्री ठाकुर ने गुलबकावली अर्क के शोधन की प्रक्रिया के सम्बंध में स्थानीय स्वसहायता समूहों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए ताकि वे सीधे इस गतिविधि से सम्बद्ध हो सकें। कलेक्टर ने गुलबकावली अर्क के बिजनेस मॉडल के सम्बंध में सम्बंधित विभागीय अधिकारियों को गतिविधियों के निष्पादन हेतु निर्देश दिए।
टमाटर के प्रोत्साहन हेतु उन्नत बीजों की कृषि एवं प्रसंस्करण की रणनीति
   ‘‘एक जिला- एक उत्पाद’’ अंतर्गत चिन्हित उत्पाद टमाटर अनूपपुर जिले में व्यापक रूप से उत्पादित किया जाता है। सहायक संचालक उद्यानिकी वीडी नायर ने अवगत कराया कि जिले में प्रतिवर्ष लगभग 80 हजार मेट्रिक टन टमाटर उत्पादित किया जाता है। कलेक्टर ने कहा उत्पादन की मात्रा, टमाटर के निर्यात एवं सम्बंधित आर्थिक गतिविधियों को व्यापक रूप प्रदान करने हेतु उपयुक्त है। यहाँ पर यह आवश्यक है कि सम्बंधित कृषक भाइयों द्वारा टमाटर के उन्नत बीजों के माध्यम से उत्पादन प्राप्त किया जाय। इसके साथ ही टमाटर के प्रसंस्करण उत्पादों- केचअप, सॉस, प्यूरी, सनड्राईड टोमैटो आदि पर भी कार्य किया जाय ताकि सप्लाई चेन में आगे आकर स्थानीय निवासी अधिक से अधिक लाभ अर्जित कर सकें। इस हेतु आवश्यक अधोसंरचना निर्माण, प्रशिक्षण कार्यक्रम, उत्पादन के विस्तार, प्रसंस्करण एवं विक्रय हेतु विभिन्न मॉडल पर चर्चा की गयी। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि उत्पादन एवं प्रसंस्करण में स्थानीय स्वसहायता समूह एवं विक्रय में बी-टू-बी बिजनेस मॉडल पर कार्य किया जाय। आपने कहा उत्पादों का विक्रय सुनिश्चित करने हेतु सप्लाई चेन की हर कड़ी का सशक्त होना आवश्यक है। सशक्त बिजनेस मॉडल कृषकों को उत्पादन बढ़ाने हेतु प्रोत्साहित करेगा। इस कार्य हेतु कृषकों को फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनायजेशन (एफपीओ) के गठन अथवा वर्तमान में स्थापित एफपीओ से सम्बद्ध कर संगठित प्रयास किया जाय।
शहद के बिजनेस मॉडल को सशक्त करने हेतु उत्पादन को बढ़ाने के कलेक्टर ने दिए निर्देश
   ‘‘एक जिला- एक उत्पाद’’ हेतु चिन्हित उत्पाद शहद की आर्थिक क्षमता एवं अब तक की गयी गतिविधि की समीक्षा में यह बात सामने आए कि क्षेत्र में स्थानीय रूप से उत्पादित शहद में पोलेन कंटेंट अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो कि शहद को विशिष्ट उत्पाद बनाता है। आईजीएनटीयू के सम्बंधित विषय विशेषज्ञ ने जानकारी दी कि क्षेत्र में शहद के उत्पादन को बढ़ाने हेतु समस्त प्राकृतिक जरूरतें उपलब्ध हैं। वर्तमान में जहाँ 4-6 हजार किलो प्रतिवर्ष शहद का उत्पादन किया जा रहा है उसे संगठित प्रयास से 50-60 हजार किलो प्रतिवर्ष किया जा सकता है। इस हेतु कृषकों को फ्लोरल कैलेंडर के अनुसार कृषि करना एवं मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर) की प्रक्रिया का प्रशिक्षण देना होगा। आपने यह भी सुझाव दिया कि इस हेतु कृषकों को मधुमक्खी पालन के आर्थिक लाभों की जानकारी देना भी आवश्यक है ताकि वे इस व्यवसाय में सक्रियता से जुड़ें। बैठक में शहद के बिजनेस मॉडल पर वृहद चर्चा कर सम्बंधित विभागीय अधिकारियों को विभिन्न दायित्वों के निर्वहन के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिए गए।
कोदो के उत्पादन को बढ़ाने के साथ विक्रय चेन को करना होगा मजबूत
बड़े शहरों में कोदो की बढ़ रही माँग का लेना होगा लाभ
   ‘‘एक जिला- एक उत्पाद’’ अंतर्गत चिन्हित पुष्पराजगढ़ अंचल में पारम्परिक रूप से उत्पादित ऋषि अन्न- कोदो चावल की माँग को स्थानीय निवासियों के हित में उपयोग करने हेतु कोदो चावल के उत्पादन को बढ़ाने एवं मार्केटिंग मॉडल को सशक्त करने पर बल दिया गया। उल्लेखनीय है कि कोदो-कुटकी मधुमेह नियंत्रण, गुर्दो और मूत्राशय के विकारों में लाभकारी है। पुष्पराजगढ़ अंचल में उत्पादित कोदो रसायनिक उर्वरक और कीटनाशक के प्रभावों से भी मुक्त है। कोदो-कुटकी हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए रामबाण है। इसमें चावल के मुकाबले कैल्शियम भी 12 गुना अधिक होता है। शरीर में आयरन की कमी को भी यह पूरा करता है। इसके उपयोग से कई पौष्टिक तत्वों की पूर्ति होती है। उक्त लाभों की वजह से महानगरों में कोदो चावल की माँग में सतत वृद्धि हो रही है एवं अच्छे दाम भी प्राप्त होने की क्षमता है। उक्त माँग को टैप करने हेतु उत्पादन को बढ़ाना एवं उत्पाद की पहुँच महानगरों तक पहुँचाना अहम है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग 5-6 हजार टन कोदो चावल का उत्पादन अनूपपुर जिले में किया जा रहा है, जिसका लगभग 90 प्रतिशत पुष्पराजगढ़ अंचल से प्राप्त होता है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि उत्पादन को बढ़ाने हेतु उत्पाद का सुनिश्चित विक्रय आवश्यक है। इस हेतु सप्लाई चेन को सशक्त करना होगा। आपने कोदो प्रसंस्करण, पैकिजिंग एवं विक्रय सभी चरणो में स्थानीय स्वसहायता समूहों को सम्बद्ध करने के निर्देश दिए।
   बैठक में वनमंडलाधिकारी अधर गुप्ता, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मिलिंद नागदेवे, एसडीएम पुष्पराजगढ़ अभिषेक चौधरी, उप संचालक कृषि एनडी गुप्ता सहित जीएम डीआईसी एवं अन्य सम्बंधित विभागीय अधिकारी, आईजीएनटीयू के विषय विशेषज्ञ, एनजीओ प्रतिनिधि उपस्थित थे।

 
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