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श्री मटरू लाल डोंगरे की जैविक हल्दी बनी ब्रांड : नागपुर तक बनाई पहचान "कहानी सच्ची है"
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छिन्दवाड़ा | 22-जनवरी-2021
    वैसे तो किसान अपनी हर एक फसल का उत्पादन पूरे समर्पण और अपनेपन के साथ करता है। अपनी उपज की देखरेख बच्चों की तरह करता है और उपज का उचित मूल्य मिल जाए तो उसकी खुशी देखते ही बनती है, लेकिन उसकी यह खुशी उस वक्त कई गुना बढ़ जाती है जब उसकी उपज को उचित मूल्य के साथ ही अपनी एक अलग पहचान मिले और दूरदराज के क्षेत्रों तक उसकी मांग होने लगे। इसी तरह की खुशी का अनुभव छिंदवाड़ा जिले के सौंसर विकासखंड के ग्राम भुम्मा के कृषक श्री मटरू लाल डोंगरे भी कर रहे हैं। इसकी वजह उनके द्वारा उगाई जा रही जैविक हल्दी का ब्रांड बनाकर उसे नागपुर तक पहचान मिलना और विभिन्न कंपनियों द्वारा मांग की जाना है। इससे कृषक श्री मटरू का जैविक खेती करने का उत्साह और दोगुना हो गया है । साथ ही वे अन्य कृषकों को भी प्रेरित कर रहे हैं । यह सब कृषि कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की आत्मा परियोजना के अंतर्गत परंपरागत कृषि विकास योजना से संभव हुआ है।
       ग्राम भुम्मा के कृषक श्री मटरू लाल डोंगरे पिता श्री धरनु के पास 0.840 हेक्टेयर जमीन है जिसमें वे मक्का, मूंगफली, तुअर, संतरा और हल्दी की खेती प्रमुखता से करते आ रहे हैं। वैसे तो श्री मटरू लाल कई वर्षों से जैविक खेती करते आ रहे थे, लेकिन उनके जैविक उत्पाद की कोई पहचान नहीं थी और उनके उत्पाद सामान्य अनाज की तरह ही बेचे जा रहे थे। वर्ष 2015-16 में उन्हें आत्मा परियोजना के अंतर्गत असिस्टेंट टेक्नालॉजी मैनेजर श्री पंकज पराडकर से परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत समूह बनाकर जैविक खेती करने की प्रेरणा मिली । उनसे यह भी जानकारी मिली कि समूह के उत्पाद की ब्रान्डिग एवं पैकिंग भी संभव हो सकेगी जिससे प्रेरित होकर कृषक श्री मटरू लाल ने समूह बनाकर जैविक खेती का निर्णय लिया। उनके जैविक समूह का नाम भुम्मा जैविक समूह रखा गया जिसमें जैविक खेती में रुचि रखने वाले ग्राम के 50 कृषकों को सम्मिलित किया गया।
       कृषक श्री मटरू लाल ने बताया कि आत्मा परियोजना द्वारा योजना के मानकों से अवगत कराने के लिये भ्रमण और प्रशिक्षण भी कराया गया। समूह के लीडर द्वारा खेती के सम्पूर्ण रिकॉर्ड का संधारण किया गया और पी.जी.एस. इंडिया की वेबसाइट में आनलाईन फीडिंग भी की जा चुकी है। वर्ष 2019-20 के अंत में समूह के कृषकों को पी.जी.एस. इण्डिया ग्रीन सर्टीफिकेट जारी किया गया है । सर्टीफिकेट जारी होने के बाद आत्मा परियोजना के सहयोग से बाजार की मांग के अनुसार कृषकों ने स्वयं ही प्रोसेसिंग कर पैकिंग का कार्य प्रारंभ कर दिया जिसमें आत्मा परियोजना द्वारा विपणन में भी मदद की जा रही है। श्री मटरू लाल बताते हैं कि उनके द्वारा उत्पादित जैविक हल्दी 300 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची जा रही है जिससे उन्हें दुगना लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही हमारी जमीन भी उपजाऊ हो रही है। राष्ट्रीय स्तर के एग्रोविजन मेला नागपुर में भी हमारी जैविक हल्दी की अच्छी मांग रही। कुछ प्रायवेट कंपनियों द्वारा भी इस जैविक हल्दी की मांग की जा रही है। अब हमारे समूह के 5 से अधिक कृषक हल्दी की जैविक खेती कर 25 क्विंटल तक हल्दी का उत्पादन कर रहे हैं। अब समूह द्वारा मूंगफली, तुअर, मूंग, उडद, धनिया और संतरा की भी ब्रांडिंग कर विपणन प्रारंभ किया जायेगा।                 
 
(37 days ago)
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