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वन स्टॉप सेंटर सखी की जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक संपन्न
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छिन्दवाड़ा | 11-फरवरी-2021
    कलेक्टर श्री सौरभ कुमार सुमन की अध्यक्षता में आज कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में वन स्टॉप सेंटर सखी की जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती कल्पना तिवारी रिछारिया, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी डॉ.श्रीमती मोनिका बिसेन, प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.सुशील राठी, सिविल सर्जन डॉ.श्रीमती पी.गोगिया, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री रजनीश चौरसिया, डी.एस.पी.सुश्री कीर्ति नरवरिया, स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभारी अधिकारी, बी.एम.ओ., महिला बाल विकास विभाग के एकीकृत बाल सेवा परियोजना के परियोजना अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
      बैठक में कलेक्टर श्री सुमन ने निर्देश दिये कि वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला या बालिका की चिकित्सा के लिये एक महिला चिकित्सक और स्टॉफ नर्स की प्रति सप्ताह जांच के संबंध में आदेश जारी करें। उन्होंने पीड़ित महिला या बालिका के प्रकरण के निराकरण के संबंध में सेंटर में निर्धारित गाईड लाईन के अनुसार अनावेदकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के संबंध में पुलिस अधीक्षक और नि:शुल्क विधिक सहायता के लिये पैनल के अधिवक्ताओं की उपस्थिति के संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष को पत्र भेजने के निर्देश दिये। उन्होंने घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के न्यायालय में लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिये न्यायालय की जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति की बैठक के एजेंडा में यह बिंदु जुड़वाने के लिये कहा। बैठक में जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी डॉ.श्रीमती बिसेन ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर सखी के अंतर्गत सभी प्रकार की हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को एक ही स्थान पर अस्थाई आश्रय, पुलिस डेस्क, विधिक सहायता, चिकित्सा व काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही एक ही छत के नीचे हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को एकीकृत रूप से सहायता व सहयोग प्रदाय करने के लिये पीड़ित महिला व बालिका को तत्काल आपातकालीन और गैर आपातकालीन सेवायें जैसे चिकित्सा, विधिक, मनोवैज्ञानिक परामर्श आदि उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि इस सेंटर के माध्यम से 18 वर्ष से कम आयु की कैंसर से पीड़ित बालिकाओं और महिलाओं को सहायता प्रदान करने के साथ ही 18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं की सहायता के लिये लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 और किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख और संरक्षण), अधिनियम 2015 के अंतर्गत गठित संस्थाओं को सेंटर से जोड़ने का लक्ष्य भी निर्धारित है। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर में पजीकृत महिलाओं/बालिकाओं, महिला हेल्पलाईन से प्राप्त प्रकरणों व उनका निराकरण, चिकित्सा, पुलिस और न्याय विभाग के समन्वय से किये जाने वाले कार्यो, घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सिलाई और अन्य प्रशिक्षण आदि की भी विस्तार से जानकारी दी।   
(67 days ago)
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