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दृष्टिबाधित दिव्यांग श्री गुल्लू चौरसिया के जीवन को मिली नई दिशा"कहानी सच्ची है"
निःशुल्क शिक्षण-प्रशिक्षण से सशक्त बनकर अकेले सफलतापूर्वक की शिरडी की यात्रा
छिन्दवाड़ा | 24-फरवरी-2021
 
     सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग के अंतर्गत जिले में संचालित जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र जिले के दिव्यांगों के जीवन में आशा की किरण ला रहा है और उनकी परेशानी दूर कर उन्हें समाज की मुख्य धारा में जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की मदद से जिले के एक दृष्टिबाधित दिव्यांग श्री गुल्लु चौरसिया के जीवन को नई दिशा मिली है तथा अब वे बिना किसी के सहायता के स्वयं ही चलने फिरने लगे हैं।  
       छिन्दवाड़ा जिले की तहसील छिंदवाड़ा के ग्राम खापाकला टोला उमरहर के 26 वर्षीय दृष्टिबाधित दिव्यांग श्री गुल्लू पिता श्री झुन्नु चौरसिया ने 12वीं कक्षा तक पढाई की है। उसके बाद एक दिन दुर्घटना हो जाने के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई और उनका जीवन अंधकारमय हो गया। उनके मन में अनेकों प्रकार के नकारात्मक विचार जैसे मैं किसके पास जाऊं, क्या करूं, कैसे अपने जीवन का निर्वाह करूं ? आदि आने लगे। इस तरह की कुंठा से ग्रस्त हो वह 5 वर्षों से घर के बाहर नहीं निकल पा रहे थे। फिर इनका संपर्क दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र के मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर श्री रविन्द्र सनोडिया से हुआ जिन्होंने श्री गुल्लू को केन्द्र में बुलवाया और ओरिएंटेशन किया गया। साथ ही मोबिलिटी (ब्लांइड स्टिक) के माध्यम से एक सप्ताह का निःशुल्क शिक्षण-प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाया गया। अब प्रशिक्षण लेकर श्री गुल्लु चौरसिया स्वयं के बल पर अकेले चलने फिरने लगे हैं। उनमें आत्मविश्वास आ गया है कि अब मैं स्वयं के कार्य तथा अपने जीवन का निर्वाह बिना किसी की सहायता से अकेले कर सकता हूँ। इस खुशी में वह अकेले ही बिना किसी की सहायता व बिना किसी परेशानी के शिरडी घूमकर घर वापस लौटकर भी आ चुके हैं। जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के प्रशासनिक अधिकारी श्री पंचलाल सूर्यवंशी ने जिले के सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि यदि उनके संपर्क में कोई भी दृष्टिबाधित दिव्यांग जिन्हें चलने फिरने में परेशानी हो तो उन्हें जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में लेकर आये और उनके जीवन को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने में उनका सहयोग जरूर करें।
(53 days ago)
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