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जन आंदोलन अभियान की कार्यशाला सम्पन्न (राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन - टीबी हारेगा, देश जीतेगा)
छतरपुर को तय समय से पूर्व मुक्त करने का संकल्प
छतरपुर | 28-फरवरी-2021
      राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी हारेगा और देश जीतेगा के जन आंदोलन अभियान को मूर्त रूप देने के लिए छतरपुर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में रविवार को सांसद डॉ. वीरेन्द्र कुमार खटीक की विशेष उपस्थिति में क्षय रोग के उन्मुखीकरण की कार्यशाला सम्पन्न हुई।
    इस अवसर पर कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह, सांसद प्रतिनिधि धीरेन्द्र नायक, सीएमएचओ, जिला चिकित्सालय के संबंधित चिकित्सकगण, एनजीओ संस्थाओं के प्रतिनिधि सहित जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने तय समय-सीमा 2025 से पूर्व छतरपुर जिले को टीबी मुक्त जिला बनाने का संकल्प लिया गया। इसके लिए जिले में प्रत्येक माह आगामी दिसम्बर तक आम लोगों को जागरूक बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों की अगुवाई में सामाजिक सहभागिता से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
    सांसद डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि क्षय नियंत्रण को समाज हेय की दृष्टि से नहीं देखें अपितु इस रोग से पीडि़त व्यक्ति को समुचित उपचार के लिए शासकीय चिकित्सालय भेजें। ऐसे रोगी का निःशुल्क समुचित उपचार एवं सम्पूर्ण जांच की जाती है तथा उपचार अवधि में प्रतिमाह शासन द्वारा तय इन्सेंटिव भी दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जिले के ऐसे क्षेत्र जहां क्षयरोग से पीडि़त व्यक्ति पाए जाते हैं उनकी पहचान करें।
    आपने निजी चिकित्सकों का आव्हान किया कि उपचार के लिए आने वाले रोगियों को क्षय नियंत्रण के लिए शासन द्वारा निःशुल्क दी जाने वाली दवाईयों के संदर्भ मेें सार्थक बातें समझाएं और उन दवाओं का सेवन करने की सलाह दें। सरकार क्षय नियंत्रण के समुचित निदान के लिए न सिर्फ सतर्क है अपितु सजगता एवं चिंतनशील प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जनजाग्रति के लिए विभिन्न गतिविधियों में बाल सृजन की गतिविधियों को भी जोड़ें। बाल सृजन विशेषकर पेंटिंग कला के जरिए भी समाज में सार्थक संदेश का उदय होता है।
    कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने कहा कि क्षयरोग को आज भी समाज में छिपाया जाता है। इस रोग को छिपाने की नहीं अपितु उपचार कराने की जरूरत है। समाज से इस रोग को दूर करने के लिए हर एक व्यक्ति को जागरूक बनकर सहयोग करना होगा। इस रोग का निदान समुचित उपचार से संभव है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक रोगी की जांच में संवेदनशीलता बरतें और उन्हें समय-समय पर प्रेरणादायी परामर्श दें, जिससे वह मानसिक रूप से भी स्वस्थ बने रहने पर विचार करें। उन्होंने कहा कि इस रोग के निदान में जनप्रतिनिधि सार्थक भूमिका निभाएं और रोगी मिलने पर उन्हें उपचार के लिए प्रेरित करें। समाज के सहयोग से रोग का निदान संभव है। शासन की ओर से परीक्षण के साथ-साथ दवाईयां भी फ्री में दी जाती हैं और उपचार होने तक रोगी को प्रतिमाह इन्सेंटिव राशि दी जाती हैै।  
नौगांव क्षय केन्द्र का होगा विस्तार
15 लाख की राशि स्वीकृत
    प्रशिक्षण कार्यशाला में नौगांव क्षय नियंत्रण केन्द्र की स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने के साथ-साथ उन्मुखीकरण करने हेतु नीति आयोग से प्राप्त राशि में से 15 लाख की राशि देने का निर्णय लिया गया। कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने सांसद डॉ. वीरेन्द्र कुमार खटीक से विचार विमर्श किया और तुरंत ही नौगांव क्षय केन्द्र के लिए राशि देने पर सहमति प्रदान की गई।
    कार्यशाला आयोजन के संबंध में प्रभारी चिकित्सक डॉ. शरद चौरसिया ने सारगर्भित जानकारी स्लाइड के माध्यम से देते हुए बताया कि भारत में प्रतिवर्ष 8 लाख टीबी के नए मरीज जुड़ते हैं जिसमें 8 लाख बलगम धनात्मक रोगी होते हैं। जिनसे समाज के अन्य 10 से 15 स्वस्थ व्यक्तियों तक प्रतिदिन यह रोग फैलता है। इस रोग से देश में प्रत्येक 3 मिनिट पर टीबी से 2 संक्रमित व्यक्तियों की आकस्मिक मृत्यु होती है। इस रोग का निदान संभव है बस हमें छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयास, विचार एवं प्रयत्न से जुड़ना होगा और विपरीत स्थिति, परिस्थितियों में भी नकारात्मक भाव नहीं आने देना चाहिए।
     क्योंकि यह हमारे प्रयास और हमारे अंदर छुपी ताकत एवं सकारात्मक ऊर्जा का दमन करती है। किसी काम को करने और उसकी सफलता हमारे प्रयास, विचार, सोच एवं क्रियाओं से प्रभावित होती है। हमें हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। समाज के सहयोग से हम सब मिलकर लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
आईये जाने क्षय रोग क्या है, कैसे फैलता है
    क्षय रोग घातक संक्रामक बीमारी है। यह रोगी के खांसने, झींकने से टीबी के जीवाणु हवा द्वारा फैलता है और विशेष रूप से फेफड़ों पर असर करता है। इस रोग का असर शरीर के मस्तिष्क, ग्रंथियों और हड्डियों पर भी होता है।
    यह वायु के द्वारा फैलता है। टीबी के रोगाणु थूक के छोटे कणोें के रूप में वातावरण में फैलते हैं तो बलगम के छोटे-छोटे कण स्वांस के साथ दूसरे स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करते हैं जिससे दूसरा व्यक्ति टीबी रोग से ग्रसित हो सकता है। इसीलिए अनउपचारित रोगी लगातार इलाज कराएं। बीच में इलाज न छोड़ें ऐसा करके रोगी व्यक्ति परिवार के सदस्यों के साथ-साथ समाज के व्यक्तियोें की भी मदद करता है।
टीबी की शंका कब, प्रकार
    किसी व्यक्ति को 15 या उससे अधिक दिन खांसी आती रहे तो उसे नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र में बलगम की जांच करानी चाहिए। इस रोग के होने पर खांसी के साथ बलगम का आना, बुखार, विशेषकर शाम को, सीने में  दर्द, भूख कम लगना, वजन का घटना और बलगम के साथ खून का आना लक्षण शामिल है।
    क्षयरोग पॉजीटिव और निगेटिव दो तरह के होते हैं। पॉजीटिव रोगी के बलगम मंे रोगाणु आते हैं तो निगेटिव टीबी में क्षयरोगी के बलगम में रोगाणु नहीं आते हैं।
रोग का इलाज
    टीबी रोग होने पर बलगम की जांच से इसकी पुष्टि होती है। इसके लिए तीन नमूने से जांच की जाती है। रोग के निदान के लिए डॉट्स (डायेक्टली ऑब्सवर्ड ट्रीटमेंट शार्टकोर्स) के जरिए दवा के निरंतरता रखी जाती है। रोगी को प्रत्यक्ष देखरेख में दवाओं का सेवन कराया जाता है। बतौर डॉट्स प्रदाता रोगी के सहयोग के लिए परिवार का कोई भी व्यक्ति हो सकता है, जिससे रोगी दवा प्राप्त करने के लिए तैयार हो।
टीबी रोग कलंकित नहीं है
    भारतीय समाज में टीबी रोग को कलंकित तौर पर देखा जाता है। परिणामस्वरूप पीडि़त व्यक्ति को सामाजिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे रोगी एवं उसके परिवार पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस रोग का निदान पूरी तरह से चिकित्सकीय प्रभाव से संभव है।
जनप्रतिनिधि की भूमिका
    टीबी उन्मूलन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सामाजिक व्यक्तियों को जागरूक करने की महती भूमिका है। निर्वाचित प्रतिनिधि क्षेत्रों में जनजागरूकता का संदेश दें और इस अभियान में लोगों को जोड़ें। निर्वाचित प्रतिनिधि निर्वाचन क्षेत्र को टीबी रोग से मुक्त कराने की जिम्मेदारी लें।
कार्यशाला प्रशिक्षण का उद्देश्य
    देश में बढ़ रहे क्षयरोग को कम करने के लिए कार्यशाला प्रशिक्षण की जनजागृति का समाज में विस्तारित करना है। साथ ही टीबी संक्रमण से होने वाली मृत्यु को कम करने में सहयोग देना है। 
(49 days ago)
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